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The big day is here! Today is the day when the devotees will witness the 'bhoomi pujan' at the Ram mandir in Ayodhya. Patna's Mahavir Mandir Trust will distribute over 1.25 lakh 'Raghupati Laddoos' on the occasion of 'bhoomi pujan' of the Ram temple today. Out of over 1.25 lakh laddoos, 51,000 laddoos will be handed over to Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust on the occasion of foundation laying ceremony of the temple. Speaking to ANI, Mahavir Mandir trustee Acharya Kishore Kunal said: "On the occasion of 'bhoomi pujan' in Ayodhya, 1,25,000 laddoos will be distributed under the name of 'Raghupati Laddoo'. 51,000 laddoos will be handed over to Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust."पहली बार रिसर्च में यह साबित हुआ है कि डायनासोर को भी कैंसर होता था। 7.6 करोड़ साल पुराने डायनासोर की जिस हड्डी को फ्रैक्चर समझा जा रहा था, उसमें मेलिग्नेंट कैंसर की पुष्टि हुई। यह हड्डी 1989 में कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में डायनासोर के जीवाश्म के तौर पर मिली थी।
लेंसेट ऑन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, शाकाहारी डायनासोर की इस हड्डी में विकृति ओस्टियोसारकोमा के कारण हुई थी। यह हड्डी का एडवांस कैंसर होता है। अब तक इसे विकृति समझा जा रहा था। इसका ट्यूमर किसी सेब के आकार से भी बड़ा है।
6 मीटर लम्बी है हड्डी में मिला ट्यूर
टोरंटो स्थित रॉयल ऑन्टेरियो म्यूजियम के जीवाश्म विज्ञानी डेविड इवांस के मुताबिक, हड्डी 6 मीटर लम्बी है। यह हड्डी क्रेटेशियस काल की है जब चार पैरों वाले डायनासोर शाकाहारी हुआ करते थे। यह हड्डी उसके लोअर लेग बोन की है। इसमें जो ट्यूमर मिला है वह काफी एडवांस स्टेज का है। यह सेब से भी बड़े आकार का है।
इंसानों की तरह डायनासोर में भी बीमारियां हुईं
लेंसेट ऑन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, हो सकता है कि 7.6 करोड़ साल पुराना सेंटेरोसॉरस डायनासोर मौत से पहले कैंसर के कारण काफी कमजोर हो गया हो। रिसर्च में जो बातें सामने आई हैं उसके मुताबिक डायनासोर में ऐसी कई बीमारियां हुई होंगी जो आमतौर पर इंसान और दूसरे जानवरों में होती हैं, जैसे कैंसर। ये इस धरती पर दूसरे जानवरों की तरह रहते थे और इन्होंने भी हादसों और बीमारियों को झेला।
रिसर्च में साबित हुआ, जानवरों में कैंसर नई बीमारी नहीं
ऑन्टेरिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉ. मार्क क्राउथर के मुताबिक, कई तरह के ट्यूमर सॉफ्ट टिश्यू में होते हैं जो आसानी से जीवाश्म में तब्दील नहीं होते। इसलिए जीवाश्म से हमें कैंसर के प्रमाण मिले हैं। रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि कैंसर कोई नई बीमारी नहीं है, इससे जुड़े कॉम्प्लिकेशन जानवरों में भी पाए जाते रहे हैं।
क्या होता है ऑस्टेरियोसार्कोमा
शोधकर्ता डॉ. मार्क क्राउथर के मुताबिक, ऑस्टेरियोसार्कोमा हड्डियों में होने वाला कैंसर है। जो आमतौर पर बच्चों और युवाओं में होता है। लेकिन लगता है डायनासोर में भी इसका खतरा ज्यादा था। रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि इनमें यह कैंसर तेजी से बढ़ा था। इस कैंसर का ट्यूमर हड्डी को तेजी से नुकसान पहुंचाता है और दूसरे टिश्यू तक पहुंचता है।
सीटी स्कैन से हुई पुष्टि
जीवाश्म विज्ञानी डेविड इवांस का कहना है, हड्डी में दिखे ट्यूमर को अधिक स्पष्ट क्षमता वाले सीटी स्कैन से जांचा गया। जांच में सामने आया कि ट्यूमर हड्डी से लिपट गया था। भले ही इससे डायनासोर की मौत न होती लेकिन उसके चलने-फिरने की क्षमता जरूर घटती।